12-ज्योतिर्लिंग (12 Jyotirling)

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति।
कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वराः॥
ज्योतिर्लिङ्ग भगवान शिव को निरुपित करता हैं. “ज्योतिर्लिङ्ग” अर्थात – रोशनी का चिन्ह या प्रतिमा । ज्योतिर्लिङ्ग का शब्दिक अर्थ है सर्वप्रभु “शिव” का ज्योति के रूप मे अवतरण ।

द्वादश ज्योतिर्लिंग

१ सोमनाथ ज्योतिर्लिंग- जो कि सौराष्ट्र, (गुजरात) के प्रभास क्षेत्र में स्थित है। इस मंदिर को प्राचीण काल में छह बार ध्वस्त एवं निर्मित किया गया है। इसकी समृद्धि को सबसे अधिक नुकसान महमूद गजनवी के हमले से पहुँचा था जो कि उसने १०२२ ई में किया था। क्रमश:...
२ मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, कुर्नूल(आंध्र प्रदेश) -आन्ध्र प्रदेश प्रांत के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तटपर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग स्थित है । इसे दक्षिण का कैलाश भी कहते हैं। क्रमश:...

३ महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग,उज्जैन,(मध्य प्रदेश) – यह मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में क्षिप्रा नदी के तटपर उज्जैन नगर में स्थित है । प्राचीनकाल में उज्जैन को अवंतिकापुरी के नाम से जाना जाता था ।
४ ॐकारेश्वर, उज्जैन,(मध्य प्रदेश)- यह नर्मदा नदी के बीच स्थित द्वीप पर मालवा क्षेत्र में स्थित है। उज्जैन से खण्डवा जाने वाली रेलवे लाइन पर मोरटक्का नामक स्टेशन है, वहां से यह स्थान 10 मील दूर है। यहां ॐकारेश्वर और मामलेश्वर दो पृथक-पृथक लिङ्ग हैं, परन्तु ये एक ही लिङ्ग के दो स्वरूप हैं। श्रीॐकारेश्वर लिंग को स्वयंभू समझा जाता है। br> ५ केदारनाथ (उत्तराखंड)- श्री केदारनाथ हिमालय के केदार नामक श्रृङ्गपर विराजमान हैं। शिखर के पूर्व की ओर अलकनन्दा के तट पर श्री बदरीनाथ अवस्थित हैं और पश्चिम में मन्दाकिनी के किनारे श्री केदारनाथ हैं। यह स्थान हरिद्वार से 150 मील और ऋषिकेश से 132 मील दूर उत्तरांचल राज्य में है।
६ भीमाशंकर (महाराष्ट्र)-श्री भीमाशंकर का स्थान मुंबई से पूर्व और पूना से उत्तर भीमा नदी के किनारे सह्याद्रि पर्वत पर है। यह स्थान नासिक से लगभग 120 मील दूर है।
७ काशी विश्वनाथ, वाराणसी(उत्तर प्रदेश)-वाराणसी (उत्तर प्रदेश) स्थित काशी के श्रीविश्वनाथजी सबसे प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में एक हैं। गंगा तट स्थित काशी विश्वनाथ शिवलिंग दर्शन हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र है।
८ त्रयम्बकेश्वर(महाराष्ट्र)-श्री त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग महाराष्ट्र प्रांत के नासिक जिले में पंचवटी से 18 मील की दूरी पर ब्रह्मगिरि के निकट गोदावरी के किनारे है। इस स्थान पर पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम भी है।
९ वैद्यनाथ, देवघर जिला(झारखंड ) - शिवपुराण में 'वैद्यनाथं चिताभूमौ' ऐसा पाठ है, इसके अनुसार (झारखंड) राज्य के संथाल परगना क्षेत्र में जसीडीह स्टेशन के पास देवघर (वैद्यनाथधाम) नामक स्थान पर श्रीवैद्यनाथ ज्योतिर्लिङ्ग सिद्ध होता है, क्योंकि यही चिताभूमि है।
१० नागेश्वर, दारुकावन, द्वारका(गुजरात)- श्रीनागेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग बड़ौदा क्षेत्रांतर्गत गोमती द्वारका से ईशानकोण में बारह-तेरह मील की दूरी पर है।
११ रामेश्वर(तमिल नाडु)- श्रीरामेश्वर तीर्थ तमिलनाडु प्रांत के रामनाड जिले में है। यहाँ लंका विजय के पश्चात भगवान श्रीराम ने अपने अराध्यदेव शंकर की पूजा की थी। ज्योतिर्लिंग को श्रीरामेश्वर या श्रीरामलिंगेश्वर के नाम से जाना जाता है।.
१२ घृष्णेश्वर, निकट एल्लोरा, औरंगाबाद जिला(महाराष्ट्र)-श्रीघुश्मेश्वर (गिरीश्नेश्वर) ज्योतिर्लिंग को घुसृणेश्वर या घृष्णेश्वर भी कहते हैं। इनका स्थान महाराष्ट्र प्रांत में दौलताबाद स्टेशन से बारह मील दूर बेरूल गांव के पास है।