महाशिवरात्रि (Mahashivaratri)

'महाशिवरात्रि' फाल्गुन कृष्ण पक्ष क़ी चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इसदिन लोग व्रत रखते है और सारी रात मन्दिरों मे भगवान शिव का भजन होता है| सुबह भक्तगण नहा धोकर शिव लिंग पर जल, दूध एवं फूल इत्यादि चढ़ाते हैं और ॐ नमः शिवाय , जय शंकर जी की बोलते है| शाम को शिवजी क़ी बारात निकाली जाती है एवं सभी भक्तगण हर्ष व उल्लास के साथ प्रेम भाव से जयकारा करते हैं।

पूजा की तैयारी :

1. जल 2. दूध 3. फूल 4. बेलपत्र 5. शहद 6. पान के पत्त्ते 7. चन्दन 8. धूप 9. दिया 10. धतूरा

महाशिवरात्रि पूजन विधि (Mahashivaratri Vidhi in Hindi)

महाशिवरात्रि के दिन सभी भक्त पुरे दिन व्रत रखते हैं और रात भर भग्वान शिव का भजन गाते हैं अगले दिन स्नानादि होकर भक्त जन मंदिर जाते हैं। शिव लिंग को दूध ,पानी और शहद से नहलाते है. उसके बाद उस पर चन्दन का तिलक शिव लिंग पर लगाया जाता है फूल (धतूरा), फल , पान के पत्त्ते चढाये जाते है और धूप दिया जलाया जाता है. उसके बाद भक्तगण अपना व्रत खोलते हैं।

शिव पुराण में इन छः वस्तुओं का विशेष ढ़ंग से महत्व बताया गया हैः

१ - बेलपत्र से जल का छिड्काव, इसका तात्पर्य है कि शिव की क्रोध की अग्नि को शान्त करने के लिये उन्हे शीतल जल व पत्ते से स्नान कराया जाता है जो कि आत्मा कि शुद्धि का प्रतीक है।
२ - जल से स्नान के बाद शिव लिंग पर चन्दन का टीका लगाया जाता है जो कि शुभ जाग्रत करने का प्रतीक है।
३ - फल, फूल चढा कर और आराधना कर हम भगवान की कृपा और जीवनदान का आभार व्यक्त करते हैं. क्यों कि भगवान शिव ही इस दुनिया के रचयिता और पालनहार हैं.।
४ - धूप जलानाः धूप जला कर हम प्रार्थना करते हैं कि जिस तरह धूप जल कर अशुद्ध वायु, कीटाणु, गंदगी का नाश करता है उसी तरह हे देव आप हमारे सब संकट, कष्ट, दुःख दूर कीजिये।
५ - दिया जलानाः दिया जला कर हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हे भगवान हमें ज्ञान देकर विद्वान बनाये जैसे दिये रोशनी से प्रकाश फैलता है।
६ - पान का पत्ताः संतोष का प्रतीक है कि आपने हमें जो दिया है हम उसी में सन्तुष्ट हैं हमें जो दिया है हम उसी का धन्यवाद करते है।

भगवन शिव का लिंग के रूप में अवतरण :-