मुखरूप से दो स्थानों का विशेष महत्व है :- १. गोमुख व हरिद्वार २. देवघर ( बैद्यनाथ धाम)
(1.Gomukh to Haridwar 2. Devghar (Baidyanath Dham)

गोमुख व हरिद्वार –
गोमुख ,गंगाजी का उद्गम स्थल, व हरिद्वार (हर की पौड़ी) से करोड़ों शिवभक्त काँवड़ में गंगाजल भरकर पैदल यात्रा करते हुए अपने –अपने प्रांतों में आते हैं और गंगाजल से शिवजी के मंदिर में अभिषेक करते हैं।
देवघर ( बैद्यनाथ धाम) –
झारखण्ड के जे. सी.डी. रैलवे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर देवघर हैं, जहाँ महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग के रूप में बैद्यनाथ धाम है। सावन के महीने में यहाँ पर शिवभक्त काँवड़ चढ़ाते हैं। यहाँ पर सुल्तानगंज से शिवभक्त गंगाजल भरकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बैद्यनाथ धाम पहुँचकर शिव जी का अभिषेक करते हैं। काँवड़ में दो कलश या डब्बा गंगाजल से भरा होता है। एक का जल बाबा बैद्यनाथ पर चढ़ाते हैं और दूसरे का देवघर से 44 किलोमीटर दूर बाबा बासुकीनाथ पर चढ़ाते हैं । कुछ शिव भक्त 24 घंटों के अंदर हीं यह दूरी तय करते हैं , वे बिना विश्राम के काँवड़ उठाने के बाद शिव जी के अभिषेक के बाद हीं रुकते हैं । ऐसे शिव भक्तों को डाक बम कहते हैं।
काँवड़ पूजन विधि :-(Kavad Pujan Vidhi)